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ऐतिहासिक पद्धतियां

ऐतिहासिक पद्धतियां (Historical methods) उन सुव्यवस्थित उपागमों के समुच्चय को संदर्भित करती हैं, जिनका प्रयोग इतिहासकार अतीत के अन्वेषण, विश्लेषण तथा निर्वचन हेतु करते हैं। इस पद्धति के माध्यम से प्रयोगात्मक पद्धतियों पर निर्भर न होकर, इतिहासकार दस्तावेजों, पुरावशेषों, चित्रों, मौखिक साक्षात्कारों और भौतिक अवशेषों जैसे पुरातात्विक साक्ष्यों का सूक्ष्म परीक्षण कर ऐतिहासिक ज्ञान अर्जित करते हैं। यह प्रक्रिया किसी विशिष्ट विषय के चयन और उस पर उपलब्ध शोध-साहित्य की समीक्षा से शुरू होती है, जिससे अध्ययन की जा चुकी विषय-वस्तु की व्यापक समझ विकसित की जा सके। तत्पश्चात, इतिहासकार बाह्य समीक्षा (Heuristics) अथवा गहन जांच के स्रोतों, जो किसी स्रोत की प्रामाणिकता, उद्गम और विश्वसनीयता को सत्यापित करते हैं, का संग्रह करते हैं।

साहित्‍यिक चोरी

साहित्यिक चोरी (Plagiarism) का आशय किसी अन्य व्यक्ति के शब्दों, विचारों अथवा अभिव्यक्तियों को अपनी मौलिक कृति के रूप में प्रस्तुत करने से है। यद्यपि विभिन्न संस्थानों एवं संस्कृतियों के अनुसार इसकी परिभाषाओं में सूक्ष्म अंतर हो सकता है, तथापि इसे शैक्षणिक, शोधपरक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में नैतिक मानदंडों के उल्लंघन के रूप में माना जाता है। यह अवधारणा मुख्य रूप से स्वामित्व, उत्तरदायित्व एवं प्रतिष्ठा जैसी अवधारणाओं से संबद्ध है, जिसके प्रति सभी संस्कृतियों के दृष्टिकोणों में भिन्नता देखी जाती है। यद्यपि सामान्यतः इसे लिखित कार्यों तक सीमित समझा जाता है, किंतु वस्तुतः साहित्यिक चोरी का संबंध विचारों की मौलिकता से है, चाहे उनकी अभिव्यक्ति मौखिक हो, लिखित हो अथवा किसी अन्य कलात्मक सृजन के माध्यम से की गई हो।

 

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