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राया-रेखो

राया-रेखो मध्यकालीन भारत में विजयनगर साम्राज्य में भूमि मापन की एक मानक प्रणाली/पद्धति थी। इसका उद्देश्य कर के रूप में भू-राजस्व प्राप्त करना तथा राज्य के लिए निरंतर एक सुनिश्चित राजस्व संगृहित करने हेतु एक निश्चित मापन पद्धति एवं भुगतान दर स्थापित करना था। इस कारण यह पद्धति कृषि प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अंग बन गई।

जंगम

जंगम शब्द भगवान शिव के अनुयायियों, शैव मत के एक विशेष संप्रदाय के संन्यासियों तथा पुजारियों, को संदर्भित करता है। ‘जंगम’ का तात्पर्य ‘गतिशील लिंग’ है और यह उन लोगों का प्रतीक है जो एक स्थान से अन्य स्थान पर भ्रमण करते और लोगों को धार्मिक उपदेश/शिक्षा देते हैं। ये हिंदुओं की पारंपरिक जाति व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन इन्हें वीरशैव संप्रदाय में उच्च कोटि का ब्राह्मण माना जाता है। मूल रूप से ये वैदिककालीन शैव ब्राह्मण थे तथा बारहवीं शताब्दी में लिंगायत मत के पुजारी बन गए। उनका दावा है कि इनकी उत्पत्ति धार्मिक उपदेशों का प्रचार तथा धार्मिक संस्कार संबंधी अनुष्ठान करने हेतु शिव के शरीर से हुई है। शासकों के पुजारी एवं सलाहकारों के रूप में कार्य करने और अकबर, जहांगीर तथा औरंगजेब जैसे शासकों से भू-अनुदान प्राप्त करने के कारण भारत के इतिहास में जंगमों का अत्यधिक प्रभाव रहा है।

 

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