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साहित्‍यिक चोरी

साहित्यिक चोरी (Plagiarism) का आशय किसी अन्य व्यक्ति के शब्दों, विचारों अथवा अभिव्यक्तियों को अपनी मौलिक कृति के रूप में प्रस्तुत करने से है। यद्यपि विभिन्न संस्थानों एवं संस्कृतियों के अनुसार इसकी परिभाषाओं में सूक्ष्म अंतर हो सकता है, तथापि इसे शैक्षणिक, शोधपरक एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में नैतिक मानदंडों के उल्लंघन के रूप में माना जाता है। यह अवधारणा मुख्य रूप से स्वामित्व, उत्तरदायित्व एवं प्रतिष्ठा जैसी अवधारणाओं से संबद्ध है, जिसके प्रति सभी संस्कृतियों के दृष्टिकोणों में भिन्नता देखी जाती है। यद्यपि सामान्यतः इसे लिखित कार्यों तक सीमित समझा जाता है, किंतु वस्तुतः साहित्यिक चोरी का संबंध विचारों की मौलिकता से है, चाहे उनकी अभिव्यक्ति मौखिक हो, लिखित हो अथवा किसी अन्य कलात्मक सृजन के माध्यम से की गई हो।

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