उपयोगितावाद
उपयोगितावाद (Utilitarianism) एक नैतिक सिद्धांत है जो इस मौलिक प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास करता है कि, 'मनुष्य को क्या करना चाहिए?' यह विचारधारा इस विचार पर आधारित है कि सर्वोत्तम कार्य वही है जिससे अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख सुनिश्चित हो और दुःख या पीड़ा न्यूनतम हो सके। इसके अनुसार किसी भी निर्णय का मूल्यांकन भविष्य में होने वाले उसके परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। नैतिक निर्णय लेते समय हमें उससे प्राप्त होने वाले लाभों (सकारात्मक प्रभावों) और हानियों (नकारात्मक प्रभावों) का तुलनात्मक विश्लेषण करना चाहिए। यदि किसी कार्य के सकारात्मक परिणाम उसके नकारात्मक प्रभावों से अधिक हैं, तो वह कार्य नैतिक रूप से उचित माना जाता है। उपयोगितावाद के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति के सुख को समान महत्व दिया जाना चाहिए। यह सिद्धांत केवल व्यक्तिगत सुख तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी बल देता है कि मानव कर्म ऐसे हों जो समाज के अन्य सदस्यों के सुख में भी वृद्धि करें। इसका मूल उद्देश्य अधिकतम लोगों के लिए अधिकतम सुख की प्राप्ति करना है।

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