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इतिहास शब्द की व्युत्पत्ति यूनानी शब्द इस्तोरिया (Istoria) से हुई है, जिसका आशय अन्वेषण या जांच से है। व्यवस्थित इतिहास लेखन का प्रारंभ प्राचीन यूनान में हुआ, जहां हेरोडोटस—जिन्हें सामान्यतः ‘इतिहास का जनक’ माना जाता है—ने अपने लेखन का वर्णन करने के लिए इस शब्द का प्रयोग किया। ईसा पूर्व पांचवीं शताब्दी में रचित उनके ग्रंथों का उद्देश्य महान घटनाओं और कृत्यों, विशेष रूप से यूनानी–फारसी युद्धों की स्मृति को संरक्षित करना था। हेरोडोटस के इतिहास लेखन में कथात्मक शैली के साथ भूगोल, नृजाति वर्णन तथा कुछ अद्भुत तत्वों का समावेश भी मिलता है। उसका उद्देश्य मात्र घटनाओं का क्रमबद्ध वर्णन करना नहीं था, बल्कि इतिहास को रोचक और स्मरणीय बनाना भी था। इसी काल में थ्यूसीडाइड्स, एक अन्य ग्रीक इतिहासकार ने इतिहास लेखन में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को चिह्नित किया। पेलोपोनेसियन युद्ध के दौरान एथेंस के एक सेनापति के रूप में थ्यूसीडाइड्स ने प्रत्यक्षदर्शी विवरणों, स्रोतों के आलोचनात्मक परीक्षण तथा राजनीतिक एवं सैन्य घटनाओं पर विशेष बल दिया। उसका लेखन एक अधिक विश्लेषणात्मक और तर्कसंगत दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें मिथक और कल्पना से परहेज करते हुए सत्ता की राजनीति तथा मानवीय महत्वाकांक्षा जैसे कारणों की व्याख्या करने का प्रयास किया गया है।

रोमन इतिहास लेखन का विकास साम्राज्यवादी पृष्ठभूमि में हुआ। ऑगस्टस युग में लेखन करने वाले लिवी ने रोम के इतिहास को उसकी पौराणिक उत्पत्ति से आरंभ करते हुए एक विस्तृत एवं सुसंगत रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें राजनीतिक आख्यान के साथ नैतिक शिक्षाओं का भी समावेश किया गया है। दूसरी ओर, साम्राज्यिक प्रशासन के भीतर सक्रिय टैकिटस ने सम्राटों तथा संस्थाओं का गहन आलोचनात्मक विश्लेषण किया, जिसमें नैतिक पतन, निरंकुशता और भ्रष्टाचार जैसे पक्षों पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। रोमन इतिहासकारों ने इतिहास को एक शिक्षाप्रद माध्यम के रूप में देखा, जो समाज के लिए उदाहरण प्रस्तुत करने और चेतावनी देने का कार्य करता है।

चर्च संबंधी इतिहास लेखन ने यूनानी–रोमन परंपराओं से प्रेरणा ग्रहण करते हुए इतिहास को दैवी उद्देश्य और नैतिक व्यवस्था की व्याख्या का माध्यम बनाया। यूनानी, रोमन तथा चर्च परंपराओं के संयुक्त रूप से इतिहास लेखन की नींव एक अन्वेषण, वृत्तांत और नैतिक चिंतन के रूप में रखी गई।

 

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