औपनिवेशिक भारत में शिक्षा एवं विज्ञान के माध्यम से भारत के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया एक बहुआयामी परिघटना थी, जिसका आरंभ प्रशासनिक दक्षता के औपनिवेशिक उद्देश्य के साथ हुआ और अंततः यह आत्मनिर्भरता हेतु एक राष्ट्रवादी आंदोलन में परिवर्तित हो गई। यह संक्रमण 1835 के मैकाले के स्मरण पत्र द्वारा प्रस्तुत शिक्षा के नए स्तरों और पाठ्य-सामग्री के साथ शुरू हुआ, जिसने पारंपरिक प्राच्य शिक्षा (Oriental learning) के स्थान पर यूरोपीय साहित्य और आधुनिक विज्ञान पर केंद्रित पश्चिमी पाठ्यक्रम को प्रतिस्थापित किया। इस संरचना को 1854 के चार्ल्स वुड् के डिस्पैच द्वारा और अधिक सुदृढ़ किया गया, जिसे अकसर भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्ना कार्टा कहा जाता है; इसने प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक शिक्षा की एक श्रेणीबद्ध प्रणाली स्थापित की।
पश्चिमी विचारों के प्रसार और वैश्विक संपर्क के प्राथमिक माध्यम के रूप में अंग्रेजी भाषा ने भारत के आधुनिकीकरण में एक निर्णायक भूमिका निभाई। यद्यपि इसका प्रारंभिक उद्देश्य ब्रिटिश शासन और भारतीय जनता के मध्य 'दुभाषियों' का एक वर्ग तैयार करना था, किंतु कालांतर में अंग्रेजी, भारतीय बुद्धिजीवियों के लिए एक संपर्क भाषा बन गई। इसने विभिन्न भाषाई क्षेत्रों में लोकतांत्रिक आदर्शों और आधुनिक वैज्ञानिक विमर्श के प्रसार को सुगम बनाया।
औपनिवेशिक भारत में प्रौद्योगिक विकास का सूत्रपात 1847 में रुड़की में स्थापित अभियांत्रिकी महाविद्यालय के साथ हुआ। तत्पश्चात, 1856 में कलकत्ता अभियांत्रिकी महाविद्यालय अस्तित्व में आया। 1858 में पूना के ओवरसियर्स स्कूल का दर्जा बढ़ाकर उसे पूना इंजीनियरिंग कॉलेज में बदल दिया गया तथा उसे बॉम्बे विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया। गुइंडी इंजीनियरिंग कॉलेज को मद्रास विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
यद्यपि 1813 के चार्टर ऐक्ट में भारत में चिकित्सा के अतिरिक्त विज्ञान की किसी अन्य शाखा की शिक्षा की व्यवस्था करने की घोषणा की गई थी, तथापि लंबे समय तक किसी भी शिक्षा आयोग या योजना में विज्ञान को प्राथमिकता नहीं दी गई।
1835 में कलकत्ता में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के साथ लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ। इस मेडिकल कॉलेज ने औपचारिक चिकित्सा शिक्षा को संस्थागत बनाने में अग्रणी भूमिका निभाई, जबकि शहरी स्वच्छता और महामारी नियंत्रण के प्रबंधन हेतु इंडियन मेडिकल सर्विस की स्थापना की गई।
इसी प्रकार, यद्यपि भारत में ब्रिटिश सरकार द्वारा शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई, भले ही सीमित रूप से, तथापि इसका मूल उद्देश्य केवल ब्रिटिश साम्राज्य के हितों की पूर्ति करना था।



